ताजा ख़बरें

recent

विधानसभा में कुंभ का नाम बदलने को लेकर हंगामा, हिंदू विरोधी कदम बताया |

1
 Dhanaoura times news lucknow
विधानसभा में उत्तर प्रदेश प्रयागराज मेला प्राधिकरण, इलाहाबाद विधेयक, 2017 विपक्ष के हंगामे के बीच पारित हो गया। विपक्ष के सदस्य मेला प्राधिकरण विधेयक में अर्द्धकुंभ को कुंभ और कुंभ को महाकुंभ का नाम दिए जाने पर आक्रोशित थे। उनका कहना था कि कुंभ का नाम बदलना हिन्दू विरोधी है। सपा और कांग्रेस सदस्यों ने वेल में जाकर सरकार विरोधी नारे लगाते हुए जमकर हंगामा किया। इसी बीच विधेयक का प्रस्ताव आया तो सपा-कांग्रेस के सदस्य सदन छोड़कर चले गए। 
प्रयागराज विधेयक को लेकर हंगामा शुरू हुआ तो सपा सदस्य वेल में जाकर नारेबाजी करने लगे। कांग्रेस सदस्य भी जोर-जोर से नारे लगाने लगे। इसके पहले नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी ने अद्र्ध कुंभ को कुंभ नाम दिये जाने का विरोध करते हुए याद दिलाया कि नरेंद्र गिरी की अगुवाई में अखाड़ा परिषद के लोग 29 दिसंबर को एकजुट हो रहे हैं। कहा, शास्त्र, वेद और पुराण की परंपराओं को बदलने का अधिकार किसी को नहीं है। जो कार्य ऋषि मुनि नहीं कर सके, उसे इस सरकार ने कर दिया। यह सनातन धर्म के विनाश पर तुली है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार कैसे कोई नाम बदल देगी। क्या आप रामजन्मभूमि, कृष्ण जन्मभूमि और मानसरोवर का नाम बदल देंगे। इससे सनातन धर्म का उपहास हो रहा है। बहुमत के नाम पर सरकार सनातन संस्कृति और हिंदू धर्म को नष्ट कर रही है। सत्तापक्ष को नकली हिंदू बताते हुए कहा कि विपक्ष ही असली हिन्दू है। अब विपक्ष हिन्दू बनाम हिंदू की लड़ाई लड़ेगा। रावण ने भी अपने अहंकार में ऐसे ही बदलाव किया था। उन्होंने अध्यक्ष से अनुरोध किया कि आप जैसे प्रकांड विद्वान के रहते कुंभ का नाम बदलने की बात कहां से आ गई। नाम बदलने से हिंदू धर्म मानने वालों की आस्था को ठेस लगी है। चौधरी ने कहा कि ऋषि मुनि हमेशा से अर्द्धकुंभ, कुंभ और महाकुंभ की बात करते आए हैं। राम-राम बीज मंत्र है और सत्ताधारियों ने वोट के लिए उसे जयश्रीराम में परिवर्तित कर दिया। चौधरी आक्रामक थे। बोले, सरकार का माथा भ्रष्ट हो गया है और इसी से इनका विनाश लिखा है। सपा के पारसनाथ यादव ने कहा कि यह भूला नहीं जा सकता कि यह देश पुराणों का है। अखाड़ा परिषद भी इसका विरोध कर रहा है। कम से कम सरकार को नाम बदलते समय संतों को तो भरोसे में लेना चाहिए था। 
संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना का कहना था कि अर्द्धकुंभ का नाम इसलिए कुंभ किया गया क्योंकि सनातन धर्म में कहीं अद्र्ध नहीं है। मुख्यमंत्री की भी यही मंशा है। इसे शब्दों से नहीं पौराणिक तरीके से देखा जाना चाहिए। किसी का नाम बदलने से उद्देश्य नहीं बदलता, न आस्था बदलती और न ही फल बदलता है। उन्होंने मेला प्राधिकरण के गठन पर बल देते हुए कहा कि हम किसी पुरानी परंपरा से छेड़छाड़ नहीं कर रहे हैं लेकिन जनहित को ध्यान में रखकर आवश्यक कदम उठाए गये हैं। 
बसपा दल के नेता लालजी वर्मा इस विधेयक को प्रवर समिति को सौंपने की मांग कर रहे थे। उन्होंने विधेयक में मेला प्राधिकरण में अध्यक्ष/अध्यक्षा पद पर भी आपत्ति जताई। कहा कि पद का तो लिंगभेद नहीं होता है। उन्होंने इसमें संशोधन की मांग रखी। वर्मा की मांग पर संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने अध्यक्षा और उपाध्यक्षा पद को हटाने की घोषणा की। 
शुक्रवार को विधानसभा में कुल दस विधेयक आये। सभी विधेयकों को विपक्षी सदस्य प्रवर समिति को सौंपने की मांग कर रहे थे लेकिन पक्ष में बहुमत की वजह से अध्यक्ष ने इसे पारित करने की घोषणा की। प्रयागराज विधेयक के अलावा उत्तर प्रदेश चलचित्र (विनियम) (संशोधन) विधेयक, 2017, उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास (संशोधन) विधेयक, 2017, उत्तर प्रदेश जूनियर हाई स्कूल (अध्यापकों और अन्य कर्मचारियों के वेतन का भुगतान) (संशोधन) विधेयक, 2017, उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा (संशोधन) विधेयक, 2017, उप्र निरसन विधेयक, 2017, उप्र दंड विधि (अपराधों का शमन और विचारणों का उपशमन) (संशोधन) विधेयक, 2017, उप्र सहकारी समिति (संशोधन) विधेयक, 2017, उप्र आबकारी (संशोधन) विधेयक, 2017 और राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक 2017 सपा और कांग्रेस सदस्यों की नामौजूदगी में पारित हो गये। इस बीच उप्र दंड विधि (अपराधों का शमन और विचारणों का उपशमन) (संशोधन) विधेयक, 2017 और राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक 2017 के लिए बसपा ने प्रवर समिति को सौंपे जाने की अपनी मांग भी वापस ले ली। 
उप्र दंड विधि (अपराधों का शमन और विचारणों का उपशमन) (संशोधन) विधेयक, 2017 को बसपा प्रवर समिति को सौंपे जाने की मांग कर रही थी लेकिन, जब कानून मंत्री बृजेश पाठक ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन में नेताओं पर लगे मुकदमे वापस किये जा रहे थे तो बसपा ने प्रवर समिति को सौंपे जाने का प्रस्ताव वापस ले लिया। 
संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि राज्य विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक, 2017 में छोटी सी भूल सुधार की गई है। इसमें डॉ. भीमराव अंबेडकर का नाम सही किया गया है। राज्यपाल ने गत दिनों डॉ. भीमराव अंबेडकर का सही नाम डॉ. भीमराव आंबेडकर बताया था। उसे ही संशोधित किया गया है। अब आगरा विश्वविद्यालय का नाम डॉ. भीमराव अंबेडकर की जगह डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा जाना जाएगा।
विधानसभा में कुंभ का नाम बदलने को लेकर हंगामा, हिंदू विरोधी कदम बताया | Reviewed by Ravindra Nagar on December 23, 2017 Rating: 5

No comments:

All Rights Reserved by Dhanaoura Times © 2014 - 2015
Designed by RK TECHNOLOGIES

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.