लखनऊ की सादिया 23 वर्ष की उम्र में ही पार्षद बनीं
Dhanaoura times news Lucknow
प्रदेश की राजधानी में 23 वर्ष की उम्र में पार्षद बनीं सादिया उत्साह से भरी हैं। नगर निगम की सबसे युव पार्षद सादिया ने पत्रकारिता की पढ़ाई कर रही हैं।
लखनऊ निकाय चुनाव में वार्ड 34 तिलकनगर से लखनऊ की सबके कम उम्र की पार्षद बनीं 23 वर्षीय निर्दलयी प्रत्याशी सादिया रफीक ने भाजपा प्रत्याशी को हराया। सादिया रफीक ने भाजपा प्रत्याशी को हराकर चर्चा बटोर ली है। सादिया रफीक ने भाजपा की अर्चना द्विवेदी को करीब 600 वोटों के अंतर से हराया। सादिया अपनी जीत के बारे में कहती हैं कि भाजपा प्रत्याशी से चुनाव जीतना उनके लिए इतना आसान नहीं था। मगर उनकी जीत में सबसे बड़ी भूमिका निभाने का काम उनकी पत्रकारिता की पढ़ाई ने किया। जब वो लोगों के बीच जाती थीं, तो लोगों को जब पता होता था कि उनकी निर्दलीय प्रत्याशी पढ़ी-लिखीं युवा हैं और उसमें भी पत्रकारिता की स्टूडेंट तो लोगों के अंदर एक उम्मीद की किरण दिखने लगती थी। लोगों ने उनकी पढ़ाई को तवज्जो देते हुए ही उन्हें वोट किया है और जिताया है।
लखनऊ नगर निगम चुनाव में युवाओं का चेहरा बनीं सादिया रफीक की जीत कई मायनों में खास है। यह की सादिया ने अपने परिवार की वजह से राजनीति को नहीं चुना, बल्कि बचपन से ही उनके दिल में तमन्ना थी समाजसेवा करने की। सादिया को जब राजनीति में हाथ आजमाने का मौका मिला, तो उन्होंने मौके पर चौका मार दिया। सादिया ने बताया कि वह तो पॉलिटिकल फैमिली से आती हैं। उनके पिता, चाचा और भाई काफी पहले से चुनाव लड़ते आए हैं और उन्होंने जनता के प्रतिनिधि के तौर पर लोगों की सेवा भी की है।
बचपन से ही अपने घर में राजनीति के गुर सीखती रही हैं। राजनीतिक परिवार से होने के नाते उनके अंदर किसी नौकरी की लालसा नहीं जगी। उन्होंने अपनी पढ़ाई भी वैसी ही चुनी, जिसके जरिये वो समाज की सेवा कर सकती हैं। सादिया ने बताया कि मेरे परिवार के लोगों ने प्रधानी से लेकर पार्षदी तक का चुनाव लड़ा है। मैं एक पॉलिटिकल परिवार से आती हूं।
यह सभी चीजें बचपन से देखते-देखते मेरे भीतर ही राजनीति की इच्छा जगी। यही वजह है कि जब मैंने अपने परिवार को राजनीति और समाजसेवा के बारे में बताया, तो उन्होंने कभी मुझे मना नहीं किया. मेरे पापा, मेरे भईया इससे पहले इस वार्ड के पार्षद रह चुके हैं और अब मैं।
फोटोग्राफी का शौक रखने वाली सादिया अभी एमिटी यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन से ग्रेजुएशन कर रही हैं। पत्रकारिता की पढ़ाई करने के पीछे की वजह वो बताती हैं कि उनके भीतर समाज सेवा की भावना ने ही उन्हें पत्रकारिता की तरफ मोड़ा। वो मानती हैं कि लोगों की आवाज बनने के लिए उनके लिए पत्रकार बनना जरूरी है या फिर जनप्रतिनिधि बनना। सादिया कहती हैं कि वो जब अपने इलाके में लोगों को बुनियादी जरूरतों के लिए जद्दोजहद करती हुई देखती हैं, तो उनका मन कचोटने लगता है।
सादिया से बताया कि काम के मामले में मैं सबसे पहले पेयजल की समस्या को दूर करने का काम करूंगी। मेरे वार्ड में युवतियां, महिलाएं और छोटे बच्चे घर से बाहर निकल कर सड़क पर पानी भरने के लिए निकलते हैं। मेरे वार्ड में सीवर भी क्षेत्र की बड़ी समस्या है, इसके समाधान का प्रयास करूंगी। उन्होंने कहा मैं नहीं चाहती कि कोई महिला या लड़की पानी भरने के लिए अपने घरों से बाहर निकले। मैं चाहती हूं लड़कियां और महिलाएं सशक्त हों और अपने हक की लड़ाई लडऩे और अपने सपनों को साकार करने के लिए घर की दहलीज से बाहर निकलें। मेरी पूरी कोशिश होगी कि मैं क्षेत्र की महिलाओं और युवतियों को सशक्त करूं।
सादिया ने कहा कि वो पत्रकारिता की पढ़ाई और राजनीति दोनों साथ-साथ जारी रखेंगी। इतना ही नहीं, वो इसी स्ट्रीम से मास्टर भी करेंगी। उनका मानना है कि पढ़े लिखे लोगों को राजनीति में जरूर आना चाहिए।
उन्होंने लड़कियों की राजनीति में आने की पुरजोर तरीके से वकालत भी की। उन्होंने कहा लड़कियों व महिलाओं को सिर्फ मुखौटा बनकर राजनीति में नहीं आना चाहिए, बल्कि खुद निर्णय लेने की क्षमता के साथ राजनीति में कदम रखना चाहिए।
सरकारी नौकरी करने के सवाल पर सादिया ने कहा कि वो कभी भी नौकरी नहीं करेंगी। पढ़ाई के बाद भी राजनीति में ही रहेंगी और राजनीति में ही अपना करियर बनाएंगी और लोगों की आवाज बनेंगी।
लखनऊ की सादिया 23 वर्ष की उम्र में ही पार्षद बनीं
Reviewed by Ravindra Nagar
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December 03, 2017
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