योगी सरकार को एनजीटी का अादेश- संभल के 100 गांवों में शुद्ध पेय-जल दें
Dhanaoura times news Lucknow
यूपी के संभल जिले में दूषित पानी के मामले की सुनवाई कर रहे नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश की योगी सकार को 100 गांवों में शुद्ध पेयजल पहुंचाने के आदेश दिए हैं. इसके साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार को संभल में शुद्ध पानी कैसे पहुंचाया जाए, इसके लिए विस्तार से योजना बनाकर एनजीटी में दाखिल करने का आदेश भी दिया है.
एनजीटी ने मामले की सुनवाई के दौरान चिंता जाहिर करते हुए कहा कि यह काफी दुखद है कि गरीब लोग और खासकर बच्चों को पीने के लिए साफ पानी नही है लेकिन वे लोग इसी पीने को पीने के लिए मजबूर हैं. जिसमें आर्सेनिक की मात्रा काफी ज्यादा है. ऐसे में एनजीटी ने सरकार और संबंधित एजेंसी को गांव वालों को पोटेबल पानी प्रदान करने के आदेश दिए हैं.
एनजीटी ने कहा है कि ऐसे हैंडपंप को तुरंत सील किया जाए, जो पानी के साथ आर्सेनिक की ज्यादा मात्रा निकालते हैं. बता दें कि संभल जिले के करीब 100 गांवों का ग्राउंड वाटर मैग्नीशियम और लौह जैसे तत्वों से भरा हुआ है. पानी देखकर की लगता है कि वो पीने लायक नहीं है. पानी का रंग पीला है, जिसे पीकर हज़ारों की संख्या में लोग बीमार हो रहे हैं. मामले की सुनवाई 14 मार्च को होगी.
दरअसल अधिवक्ता गौरव बंसल ने ट्रिब्यूनल में याचिका दायर कर कहा था कि संभल जिले के सैकड़ों गांवों में लोग प्रदूषित पानी पीने को मजबूर हैं. उन्होंने याचिका में कहा है कि राज्य सरकार ने लोगों को शुद्ध जल मुहैया करवाने के लिए कोई भी कदम नहीं उठाया है. जिसकी वजह से लोग प्रदूषित हो चुके भू-जल के पानी को पीने के लिए मजबूर हैं. जिसके बाद 14 अगस्त को हुई सुनवाई में ट्रिब्यूनल ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण को कहा था कि यह उसकी जिम्मेदारी है कि यह सुनिश्चित हो सके कि लोगों को पीने के लिए शुद्ध जल मिल सके. मामले में ट्रिब्यूनल ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को 31 अगस्त 2017 तक एफिडेविट फाइल करने का निर्देश दिया था.याची ने अपनी याचिका में कहा था कि इन गांवों में बच्चे और बूढ़े प्रदूषित पानी पीने की वजह से कई तरह की बिमारियों से ग्रसित हैं. उन्होंने याचिका में यह भी अपील की थी कि ट्रिब्यूनल राज्य सरकार को निर्देशित करे कि इन गांवों में पोटेबल पीने की पानी की व्यवस्था प्रदान की जाए.
यूपी के संभल जिले में दूषित पानी के मामले की सुनवाई कर रहे नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश की योगी सकार को 100 गांवों में शुद्ध पेयजल पहुंचाने के आदेश दिए हैं. इसके साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार को संभल में शुद्ध पानी कैसे पहुंचाया जाए, इसके लिए विस्तार से योजना बनाकर एनजीटी में दाखिल करने का आदेश भी दिया है.
एनजीटी ने मामले की सुनवाई के दौरान चिंता जाहिर करते हुए कहा कि यह काफी दुखद है कि गरीब लोग और खासकर बच्चों को पीने के लिए साफ पानी नही है लेकिन वे लोग इसी पीने को पीने के लिए मजबूर हैं. जिसमें आर्सेनिक की मात्रा काफी ज्यादा है. ऐसे में एनजीटी ने सरकार और संबंधित एजेंसी को गांव वालों को पोटेबल पानी प्रदान करने के आदेश दिए हैं.
एनजीटी ने कहा है कि ऐसे हैंडपंप को तुरंत सील किया जाए, जो पानी के साथ आर्सेनिक की ज्यादा मात्रा निकालते हैं. बता दें कि संभल जिले के करीब 100 गांवों का ग्राउंड वाटर मैग्नीशियम और लौह जैसे तत्वों से भरा हुआ है. पानी देखकर की लगता है कि वो पीने लायक नहीं है. पानी का रंग पीला है, जिसे पीकर हज़ारों की संख्या में लोग बीमार हो रहे हैं. मामले की सुनवाई 14 मार्च को होगी.
दरअसल अधिवक्ता गौरव बंसल ने ट्रिब्यूनल में याचिका दायर कर कहा था कि संभल जिले के सैकड़ों गांवों में लोग प्रदूषित पानी पीने को मजबूर हैं. उन्होंने याचिका में कहा है कि राज्य सरकार ने लोगों को शुद्ध जल मुहैया करवाने के लिए कोई भी कदम नहीं उठाया है. जिसकी वजह से लोग प्रदूषित हो चुके भू-जल के पानी को पीने के लिए मजबूर हैं. जिसके बाद 14 अगस्त को हुई सुनवाई में ट्रिब्यूनल ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण को कहा था कि यह उसकी जिम्मेदारी है कि यह सुनिश्चित हो सके कि लोगों को पीने के लिए शुद्ध जल मिल सके. मामले में ट्रिब्यूनल ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को 31 अगस्त 2017 तक एफिडेविट फाइल करने का निर्देश दिया था.याची ने अपनी याचिका में कहा था कि इन गांवों में बच्चे और बूढ़े प्रदूषित पानी पीने की वजह से कई तरह की बिमारियों से ग्रसित हैं. उन्होंने याचिका में यह भी अपील की थी कि ट्रिब्यूनल राज्य सरकार को निर्देशित करे कि इन गांवों में पोटेबल पीने की पानी की व्यवस्था प्रदान की जाए.
योगी सरकार को एनजीटी का अादेश- संभल के 100 गांवों में शुद्ध पेय-जल दें
Reviewed by Ravindra Nagar
on
January 29, 2018
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