तीन तलाक कह देने से तलाक नहीं होता, ये गैर शरई है और कुरआन के खिलाफ
Dhanaoura times news
तीन बार तलाक कह देने से तलाक नहीं होता, ये गैर शरई है और कुरआन इसकी सख्त निंदा करता है। पैगंबर मोहम्मद साहब और पहले खलीफा हजरत अबू बकर रजि अल्लाह तआला अनहू के दौर में भी एक बार में एक ही तलाक का शरई कानून था। अहले हदीस के अध्यक्ष इकबाल अहमद का कहना है कि तलाक देने का शरई तरीका तीन महीने का है। मुस्लिम बुखारी शरीफ के हदीस नंबर 1472 से ये सिद्ध है।
उन्होंने कहा कि बुखारी शरीफ के जिल्द 9 पेज 362 में फतेहउल-बारी में स्पष्ट है कि इस्लाम के दूसरे खलीफा हजरत उमर फारुक रजि. के दौर में जब कोई एक बार में तीन तलाक दे देता था तो उसे लागू तो कर देते थे पर 80 कोड़े मारने का हुक्म देते थे।
उन्होंने कहा कि बुखारी शरीफ के जिल्द 9 पेज 362 में फतेहउल-बारी में स्पष्ट है कि इस्लाम के दूसरे खलीफा हजरत उमर फारुक रजि. के दौर में जब कोई एक बार में तीन तलाक दे देता था तो उसे लागू तो कर देते थे पर 80 कोड़े मारने का हुक्म देते थे।
उनका कहना है कि पैगंबर मोहम्मद साहब के दौर में जब दीन मुकम्मल हो गया तो उन्हीं का हुक्म मानेंगे क्योकि उनके दौर में एक बार में एक तलाक को ही मान्यता थी। गौरतलब है कि तीन तलाक की शिकार हजारों महिलाएं अपनी और बच्चों की परवरिश करने के लिए जूझ रही हैं। कोर्ट के बजाय दारुलकजा आएं तीन तलाक पर मचे घमासान को देखते हुए जुमे की नमाज में मस्जिदों से लोगों को जागरूक किया गया। मुस्लिमों को आकर्षित करने के लिए तकरीर हुई कि निकाह, तलाक, खुला, मुस्लिम समस्याओं को हल कराने के लिए कोर्ट जाने के बजाय दारुलकजा से संपर्क करें।
शहरकाजी मौलाना आलम रजा खां नूरी व मुफ्ती-ए-शहर मौलाना मुफ्ती रफी अहमद निजामी के आह्वïन पर मस्जिदों में पेशइमाम ने जुमा की नमाज के पूर्व शरई कानूनों की जानकारी दी। शहर काजी ने कहा कि किसी भी समस्या के निदान को दारुलकजा, दारुल उलूम अशरफिया अहसानुल मदारिस जदीद रजबी रोड पर मुफ्ती हजरात से संपर्क करें ताकि कुरआन व हदीस की रोशनी में फैसला दिया जा सके।
तीन तलाक कह देने से तलाक नहीं होता, ये गैर शरई है और कुरआन के खिलाफ
Reviewed by Ravindra Nagar
on
December 23, 2017
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